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शिक्षा की गुणवत्ता के लिये सतत एवं समग्र मूल्यांकन
पृष्ठभूमि एवं अवधारणा
शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के अनुसार 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों का अधिकार है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना। कानून के सेशन 29 में स्पष्ट कहा गया है कि कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम बनाते समय यह ध्यान रखा जाए कि पाठ्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास करने वाला हो। स्कूल और कक्षाओं में पढ़ने-पढ़ाने के तरीके बच्चों की अंतर्निहित क्षमताओं को उभारे और उनमें अपना ज्ञान निर्माण स्वयं करने की क्षमता विकसित हो। बच्चों ने जो सीखा है उसका मूल्यांकन उनके पढ़ने के दौरान लगातार होता रहे और उन्हें परीक्षा का भय नहीं लगे। परीक्षाएं बच्चों का मूल्यांकन भी बताने वाली हो साथ ही उससे शिक्षक को अपनी शिक्षण योजना में बदलाव करने का आधार एवं मौका भी मिले।
इस प्रकार सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन की प्रक्रिया वास्तव में व्यापक गुणवतासुधार प्रक्रिया ही है। इसे सीखने-सिखाने की विधा एवं विद्यार्थी के स्कूल-आधारित मूल्यांकन व्यवस्था के रूप में ही समझा जाये जिसमें विद्यार्थी के सीखने के सभी पक्षों पर ध्यान दिया जाता है।
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में सततता जहां एक ओर कक्षा प्रक्रिया के रूप मे होगी वहीं सावधिक मूल्यांकन के रूप में भी होगी। व्यापकता उन मुद्दों को प्रमुख रूप से रेखांकित करेगी जो बच्चों के विभिन्न कौशल, भावात्मक और क्रियात्मक पक्ष को उजागर करेगी।
राज्य में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन लागू करने के चरण -
1- प्रथम चरण 2010-11 : राज्य में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन को अधिनियम के लागू होने के साथ ही पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में मई 2010 से अलवर एवं जयपुर के 60 विद्यालयों में सर्वप्रथम कक्षा 1-5 तक एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों के साथ शुरू किया गया।
2- दितीय चरण 2012-13 : अकादमिक सत्र 2012-13 से सतत एवं व्यापक मूल्यांकन राज्य में 178 ब्लॉक के 3059 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों एवं पायलेट प्रोजेक्ट के विद्यालयों में कक्ष 6 से 8 तक शुरू किया गया।
3- तृतीय चरण 2013-14 : इस शैक्षिक सत्र में सम्पूर्ण ब्लॉक को कवर करते हुए लगभग 9 ब्लॉक के 2500 विद्यालयों की प्राथमिक कक्षाओं में सीसीई के विस्तार पर कार्य किया गया। इस प्रकार इस समय लगभग 5811 विद्यालयों में सीसीई का संचालन किया जा रहा है।
आकलन/मूल्यांकन उपकरण
1 सतत अवलोकन अभिलेखन 2 चैकलिस्ट 3 पोर्टफोलियो 4 कक्षा कार्य 5 गृह कार्य 6 अन्य शिक्षिकाओं अभिभावकों एवं साथियों द्वारा आकलन 7 प्रोजेक्ट कार्य आदि
पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन प्रक्रिया
कक्षा 1 से 5 तक के पाठ्यक्रम को कक्षावार एवं विषयवार दो भागों में विभाजित कर माड्यूल्स तैयार किये गये हैं। शिक्षण-सत्र को पाँच-पाँच माह के दो टर्म में विभाजित किया गया है। प्रथम-टर्म, जुलाई से नवम्बर तक तथा दितीय-टर्म दिसम्बर से अप्रैल तक।
बच्चों की प्रगति को दर्ज करने के लिए ग्रेड दिया जाना तय किया गया है। इसका आधार इस प्रकार है:-
अ - स्वतंत्र रूप से कर लेता है। ब - शिक्षक की मदद से कर पाता है। स - विशेष मदद की आवश्यकता है।
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के परिपेक्ष्य में विद्यालय का स्वरूप
• शिक्षकों को अपनी शिक्षण योजना में बदलाव करना होगा।
• पाठ्यक्रम का प्रबंधन इस प्रकार करना होगा कि दक्षताओं पर समग्रता के साथ काम किया जाए।
• बच्चों का नियमित मूल्यांकन करना होगा।
• कक्षा प्रबंधन एवं समय प्रबंधन को बच्चों के मूल्यांकन के आधार पर लचीला बनाना होगा।
• विद्यालय में मूल्यांकन के उपकरणों और तरीकों में बदलाव करना होगा।
• बच्चों की प्रगति को दर्ज करने के ऐसे तरीके अपनाने होंगे जो बच्चों के बारे में शिक्षा के उदेश्यों के परिपेक्ष्य में जानने आवश्यक हों।
• शिक्षण अधिगम सामग्री इस तरह तैयार करनी होगी जो कि अंततः बच्चों को ज्ञान के सृजन के अवसर देती हो।
• सीसीई के अन्तर्गत प्रयुक्त की जाने वाली सामग्री
• स्रोत पुस्तिका
• योजना एवं आकलन पंजिका
• विद्यार्थी मूल्यांकन प्रतिवेदन
• कार्य पत्रक
• पोर्टफोलियो फाइल
• संचयी अभिलेख प्रपत्र
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Last Updated :20/11/2017